सिरपुर पर्यटन में  आप का स्वागत है
सिरपुर

अंतराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर सिरपुर अपनी ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्ता के कारण आकर्षण का केंद्र हैं। यह पांचवी से आठवीं शताब्दी के मध्य दक्षिण कोसल की राजधानी थी। यह स्थल पवित्र महानदी के किनारे पर बसा हुआ हैं। सिरपुर में सांस्कृतिक एंव वास्तुकौशल की कला का अनुपम संग्रह हैं। पुरातन काल (सोमवंशी राजाओ का काल) में सिरपुर को `श्रीपुर` के नाम से जाना जाता था तथा यह दक्षिण कोसल की राजधानी थी भारतीय इतिहास में सिरपुर अपने धार्मिक मान्यताओ और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के कारण आकर्षण का केन्द्र था।


लक्ष्मण मंदिर

सिरपुर का लक्ष्मण मंदिर ,बेजोड़ ईंटो से निर्मित शिल्पकला का अनुपम उदाहरण हैं। इस मंदिर का वास्तविक ढांचा इसकी मौलिक संरचना और अद्वितीय संतुलन का नायाब समन्वय हैं। यहा `पंचरथ` मंदिर में मंडप ,अंतराल और गर्भगृह(मुख्य भवन) स्थित हैं। मंदिर के बाहरी दीवालो और स्ंतभो में धार्मिक तत्वो में - वाटायन, चित्या गौवक्षा ,भारवाहकगना और कीरीतमुख ,कर्ण अमालक आदि आकर्षित करते हैं। मंदिर के मुख्य द्वार में प्रवेश करते ही शेषनाग ,भगवान शिव के उपर छतरी के रूप में विराजमान है जो सहसा ही किसी भी सैलानी के आकर्षण का मुख्य केन्द्र हैं। साथ ही प्रवेश द्वार के दूसरे तरफ भगवान विष्णु ,कृष्णलीला के आभूषणो का विभिन्न संग्रह है मंदिर के दीवालो में वैष्णव द्वारपाल के चित्र मंदिर को ऐतिहासिक रूप प्रदान करते हैं।

 


आनंद प्रभु कुटी विहार

सिरपुर अपने बौद्ध विहार के लिए विश्व भर में विख्यात हैं। इनमें मुख्य रूप से ``आनंद प्रभु कुटी विहार`` जिसका निर्माण एक बौद्ध भिक्षुक आनंद प्रभु जो भगवान बुद्ध के अनुयायी थे ,के द्वारा महाशिवगुप्त बालार्जुन राजाओ के काल में कराया गया था विहार में १४ कमरे थे जिसमे ंमुख्य प्रवेश द्वार पर स्थित स्तंभ में एक द्वारपाल का पत्थर पर निर्मित भित्तीचित्र आकर्षण का केंन्द्र हैं। विहार के अंदर भगवान बुद्ध की छ: फुट ऊंची प्रतिमा स्थित हैं।

 


स्वास्तिक विहार

`आनंद प्रभु कुटी विहार` के समीप ही एक अन्य बौद्धिक स्थल है जिसे स्वास्तिक विहार कहते हैं। इस विहार में यह मान्यता है कि इस स्थल का उपयोग बौद्ध भिक्षुक आध्यात्म और अध्ययन के उद्देश्य से करते थें।

गंधेश्वर मंदिर

इस मंदिर का ऐतिहासिक नाम 'गंधेश्वर' था यह मंदिर महानदी के किनारे स्थित है। शिव मंदिर अपने वास्तुकला के कारण प्राचीन मंदिरो और विहारो में भी गिना जाता हैं।यहां ऐतिहासिक धरोहरो का संग्रह भी कला के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं। मंदिर के प्रांगण में भगवान बुद्ध की धरती से जुड़ी मूर्ति ,नटराज, शिव ,वराह गरूड नारायण, एवं महिसासुर मर्दिनी की मूर्तिया भी सहसा आकर्षित करती हैं। प्रवेश द्वार पर `शिव लीला` के विभिन्न चित्र सैलानियो अपनी ओर आकर्षित करते है।

 

संग्रहालय

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने सिरपुर में `लक्ष्मण मंदिर` के प्रांगण में एक संग्रहालय का निर्माण किया हैं जहंा पर सिरपुर से प्राप्त दुर्लभ एवं बहुमूल्य मूर्तियो का एक अनूठा संग्रह हैं। इस संग्रहालय में वास्तुकला से जुड़ी हुई अन्य यादगार चीजे भी दर्शनीय हैं। इस संग्रह मे शैव, वैष्णव ,बौद्ध एवं जैन धर्मो से जुड़ी हुई धार्मिक आस्था की मूर्तिया विद्यमान हैं।